यह रवायत "ग़ररुलहकम" किताब से ली गई है जो इस तरह है।
قال امیر المؤمنين عليه السلام:
قَد جَهِلَ مَن استَنصَحَ أعداءَهُ
अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली अलै. फ़रमाते हैं
जो दुश्मन से भलाई की उम्मीद रखे वह (दरअस्ल) नादान है।
अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली अलै. ने बताया कि नादान कौन है।
यह रवायत "ग़ररुलहकम" किताब से ली गई है जो इस तरह है।
قال امیر المؤمنين عليه السلام:
قَد جَهِلَ مَن استَنصَحَ أعداءَهُ
अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली अलै. फ़रमाते हैं
जो दुश्मन से भलाई की उम्मीद रखे वह (दरअस्ल) नादान है।